Monday, 9 March 2026

पद - विभेद

​नाम किसी का जो भी आए, संज्ञा उसे सदा तुम जानो,

व्यक्ति, वस्तु या कोई स्थान, सत्य यही बस तुम मानो।

​नाम हटाकर जो लग जाए, शब्द वही सर्वनाम कहाता,

मैं, तुम, वह और उसका—यह, सबका नाता है समझाता।

​कैसा है या कितना है जो, वह विशेषण बतलाता है,

रंग, रूप या गुण-दोषों को, सुन्दरता से दर्शाता है।

​हँसना, रोना, पढ़ना, लिखना, क्रिया सिखाती सारा काम,

बिना किए कुछ काम जगत में, मिलता कभी नहीं आराम।

​जो न बदले रूप कभी भी, अव्यय उसको ही तुम मानो,

किन्तु, परन्तु, और, तथा को, अपरिवर्तित ही तुम जानो।

​जो जोड़ें शब्दों का नाता, वे ही कारक कहलाते,

ने, को, से, में, पर—मिलकर, सुन्दर वाक्य सदा बनाते।

© अभिषेक तिवारी

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